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Sunday, May 19, 2024

जरा सा हट के

जरा सा हट के


मैं लोगों से मुलाक़ातों के लम्हें याद,
रखता हूँ मैं बातें भूल भी जाऊं पर,
लहज़े याद रखता हूँ जरा सा हट के,
चलता हूँ ज़माने की रवायत से जो,
सहारा देते हैं वो कन्धे हमेशा याद,
रखता हूँ.

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