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Thursday, July 3, 2025

har baar baarish tujhase milane ka bahaana thi

हर बार बारिश तुझसे मिलने का बहाना थी

हर बार बारिश तुझसे मिलने का बहाना थी,
अब तो ये भी तन्हाई का अफसाना थी।
तू पास नहीं, पर बूंदें तुझसे बातें करती हैं,
हर एक रिमझिम मेरे आँसू की कहानी लगती है।

ye barasaat bhi ab roola jaati hai

ये बरसात भी अब रूला जाती है

ये बरसात भी अब रूला जाती है,
तेरी कमी हर बूँद में दिखा जाती है।
छत टपकती नहीं, पर दिल भीग जाता है,
जब तन्हाई तेरी यादों को साथ लाती है।

tere bina baarish bhi sooni lagati hai

तेरे बिना बारिश भी सूनी लगती है

बिजली सी चमकी तेरी यादें घटा में,
दिल भीगा नहीं अबतक किसी दवा में।
तेरे बिना बारिश भी सूनी लगती है,
जैसे साज बिना कोई धुन अधूरी सी रहती है।

Wednesday, July 2, 2025

wo bheegana tere sang ab khwaab ho gaya

वो भीगना तेरे संग अब ख्वाब हो गया

वो भीगना तेरे संग अब ख्वाब हो गया,
हर बारिश में तेरा चेहरा किताब हो गया।
तेरे बिना तो हर बूंद जहर सी लगती है,
जिसमें मेरा हर जख्म बेहिसाब हो गया।

baarish aayi to bheeg gaya tan

बारिश आई तो भीग गया तन

बारिश आई तो भीग गया तन,
तेरे बिना फिर भी सूना है मन।
जो सुख था तेरे साथ की बारिश में,
अब वही दर्द बन कर करता है दहन।

tere jaane ke baad har baarish kuchh kahati hai

तेरे जाने के बाद हर बारिश कुछ कहती है

तेरे जाने के बाद हर बारिश कुछ कहती है,
तेरी यादें बूँद-बूँद बनकर बरसती हैं।
दिल की दीवारें भी अब नम सी हो गईं,
तेरी कमी हर फिज़ा में बसती है।

Thursday, June 26, 2025

barasaat ki raat thi, dil tanaha tha

बरसात की रात थी, दिल तनहा था

बरसात की रात थी, दिल तनहा था,
तेरे बिना ये आलम थोड़ा ज्यादा ग़मग़ीन था।
हर बूँद कह रही थी बस एक ही बात,
क्यों छोड़ गया तू मुझे इस काली बरसात में?

baarish ki boondon mein tera chehara nazar aaya

बारिश की बूंदों में तेरा चेहरा नज़र आया

बारिश की बूंदों में तेरा चेहरा नज़र आया,
हर एक बूँद ने तेरा नाम ही दोहराया।
किस्मत भी भीगी थी मेरे आंसुओं में,
जब तू किसी और का सपना बन कर आया।

baarish ki boondon mein tera chehara nazar aaya

baarish ki boondon mein tera chehara nazar aaya,
har ek boond ne tera naam hi doharaaya.
kismat bhi bheegi thi mere aansuon mein,
jab tu kisi aur ka sapana ban kar aaya.

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    bheegati rahi yaaden tere sang us barasaat mein

    भीगती रही यादें तेरे संग उस बरसात में

    भीगती रही यादें तेरे संग उस बरसात में,
    खामोशियों ने लिखा कुछ दर्द जज़्बात में।
    तेरी हर बात थी उस बूंद की तरह,
    जो गिरी थी दिल के हर इक जख़्म के साथ में।

    bheeg kar socha tujhase baat kar loon

    भीग कर सोचा तुझसे बात कर लूं

    भीग कर सोचा तुझसे बात कर लूं,
    पर वो भीगापन तेरी कमी कह गया,
    हर कतरा तुझसे सवाल करता है,
    और मेरा हर जवाब तुझे याद कर गया।

    Wednesday, June 25, 2025

    baarish aayi to tujhe yaad kiya

    बारिश आई तो तुझे याद किया

    बारिश आई तो तुझे याद किया,
    तेरे संग भीगे हर पल को जिया,
    अब बारिश में बस तन्हाई मिलती है,
    तेरे बिना ये भीगना भी सज़ा सी लगती है।

    ab usi baarish mein gam barasate hain

    अब उसी बारिश में ग़म बरसते हैं

    तेरे संग जो भीगे थे वो पल कहाँ गए,
    अब तो बस अश्क ही अश्क बरसते हैं,
    कभी जो बारिश में मोहब्बत थी हमारी,
    अब उसी बारिश में ग़म बरसते हैं।

    barasaat mein tere khat bheeg gaye

    बरसात में तेरे खत भीग गए

    बरसात में तेरे खत भीग गए,
    तेरी बातें आँखों से झलक गईं,
    एक तू ही था जो लौट कर न आया,
    बाक़ी तो सारी यादें फिर भीग गईं।

    Tuesday, June 24, 2025

    ye baarish bhi teri tarah bewafa nikali

    ये बारिश भी तेरी तरह बेवफा निकली

    ये बारिश भी तेरी तरह बेवफा निकली,
    जिसे चाहा उसी को जला गई,
    सोचा था सुकून मिलेगा इस मौसम में,
    पर ये भी तेरी कमी जगा गई।

    teri vo hansi yaad aati hai

    तेरी वो हँसी याद आती है

    जब-जब बारिश होती है,
    तेरी वो हँसी याद आती है,
    अब तो हर बूँद में तन्हाई है,
    क्योंकि तू अब साथ नहीं आती है।

    baarish ki boonden bhi ab tadapaati hain

    बारिश की बूंदें भी अब तड़पाती हैं

    बारिश की बूंदें भी अब तड़पाती हैं,
    तेरे बिना हर रुत अधूरी लगती है,
    ये भीगी हवाएँ सवाल करती हैं,
    क्या तुझको भी मेरी याद आती है?

    baarish ki raaten aur teri yaaden

    बारिश की रातें और तेरी यादें

    बारिश की रातें और तेरी यादें,
    दोनों ही बेचैन कर देती हैं,
    एक सुकून चाहिए तेरी बाँहों में,
    ये भीगी हवाएँ अब रुला देती हैं।

    bheegati rahi aankhen bin baadal ke

    भीगती रही आँखें बिन बादल के

    भीगती रही आँखें बिन बादल के,
    तेरी जुदाई की बारिश कुछ ऐसी थी,
    लोग कहते हैं मौसम सुहाना है,
    उन्हें क्या पता ये तन्हाई कैसी थी।