लोग दीवारों की तरह
चंद सांसें बची हैं आखिरी दीदार दे दो
झूठा ही सही मगर एक बार प्यार दे दो
हम तो उम्र भर के मुसाफिर हैं मत पूछ
तेरी तलाश में कितने सफर किए हैं हमने
टूट कर बिखर जाते हैं वो लोग दीवारों की तरह
जो खुद से भी ज्यादा किसी और से मुहब्बत करते हैं
You Might Also Like
Listen to this post
1x
No comments:
Post a Comment