Search Indian Shayari

Monday, September 29, 2008

indian funny jokes and sayari

नींद इस सोच से टूटी अक्सर
किस तरह कटती हैं रातें उसकी


ऐसे मौसम भी गुजारे हम ने
सुबहें जब अपनी थीं शामें उसकी


आंखें मुझे तलवों से वो मलने नहीं देते
अरमान मेरे दिल का निकलने नहीं देते


अब ये होगा शायद अपनी आग में खुद जल जायेंगे
तुम से दूर बहुत रह कर भी क्या पाया क्या पायेंगे


ये खुले खुले से गेसू, इन्हें लाख तू संवारे
मेरे हाथ से संवरते, तो कुछ और बात होती


कुछ तुम्हारी निगाह काफिर थी
कुछ मुझे भी खराब होना था


न जाने क्या है उस की बेबाक आंखों में
वो मुंह छुपा के जाये भी तो बेवफा लगे


किसी बेवफा की खातिर ये जुनूं फराज कब तलक
जो तुम्हें भुला चुका है उसे तुम भी भूल जाओ


काम आ सकीं न अपनी वफायें तो क्या करें
इक बेवफा को भूल न जायें तो क्या करें


इस से पहले कि बेवफा हो जायें
क्यों न ऐ दोस्त हम जुदा हो जायें


इस पुरानी बेवफा दुनिया का रोना कब तलक
आइए मिलजुल के इक दुनिया नई पैदा करें


हम अक्सर दोस्तों की बेवफाई सह तो लेते हैं
मगर हम जानते हैं दिल हमारे टूट जाते हैं

You Might Also Like

    Listen to this post
    1x

    No comments:

    Post a Comment